Saturday, March 13, 2010

मेरी हर ख़ुशी की तस्वीर पर गम की चादर जमी रही,
हर ख्वाब टूटते गए और आँखों में बस नमी रही.
हैं देख रही ये आंखें अब मुकम्मल होते सपने...
क्योंकि दर्द से दोस्ती अब उतनी गहरी नहीं रही.
- स्वरचित